श्री चम्पेश्वरनाथ महादेव

0

श्री चम्पेश्वरनाथ महादेव जी का भी मन्दिर है, इस मन्दिर मे गर्भवति महिलाओं का जाना वर्जित है साथ हि महिलाओं को यहाँ प्रवेश के पहले बाल खोल लेने कि भी सलाह दी जाती है अर्थात बाल बाँधकर अन्दर प्रवेश करना भी मना है। कहा जाता है की आज से 1250 वर्ष पहले चम्पारण सघन वन क्षेत्र था जहाँ लोगो का आना जाना संभव नहीं था तभी यहाँ भगवान त्रिमुर्ति शिव का अवतरण हुआ। लोगों का आवगमन ना होने से भगवान शिव ने एक गाय को अपना निमित्त बनाया यह गाय रोज अपना दुध त्रिमुर्ति शिव को पिलाकर चली जाती थी। जब ग्वाला दुध लेता था तब दुध नहि आता था इस बात से ग्वाले को सन्देह हुआ और उसने एक दिन गाय का पिछा किया तो देखा कि गाय अपना दुध शिवलिंग को पिला रही है, उसने यह बात राजा को बताई  और इस तरह यह बात पुरे विश्व में फैल गई और दुर-दुर से लोग भगवान श्री त्रिमुर्ति शिव के दर्शन के लिए आने लगे। इसे त्रिमुर्ति शिव पुकारे जाने का भी एक कारण यह है की यह शिवलिंग तीन रुपों का प्रतिनिधित्व करता है उपरी हिस्सा गपति का, मध्य भाग शिव का और निचला भाग माँ पार्वती का इस कारण इसे त्रिमुर्ति शिव के नाम से पुकारा जाता है। साथ ही यहाँ एक गौ शाला भी संचालित है, जहाँ बडी संख्या में गौ पालन किया जा रहा है। गायों के लिये यहाँ बहुत अच्छी व्यवस्था है, उनके स्वस्थ्य एवं खान-पान का भी यहाँ पुरा ध्यान रखा जाता इसका अन्दाजा यहाँ पल रहे हष्ट-पूष्ट गायों को देखकर हि लगाया जा सकता है। यहाँ गर्भवति गायों, नवजात बछडों, व बिमार गायों के लिये अलग-अलग रहने कि व्यवस्था कि गई है। साथ हि हर एक गाय के लिये अलग-अलग चारे व पानी का बन्दोबस्त है, गायों के लिए पर्याप्त पंखे लगे हुए है, यही नहीं यहाँ गायों का भोजन तैयार करने के लिये एक बडी रसोई भी है।।




Leave A Reply

*