देश-विदेश की नामी गिरामी कंपनियां अब छत्तीसगढ़ की औषधियों पर शोध करेंगी।

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रायपुर। देश-विदेश की नामी गिरामी कंपनियां अब छत्तीसगढ़ की 1500 औषधियों पर शोध करेंगी। छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड ने इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए खाका तैयार किया है। रिसर्च से आई रिपोर्ट के आधार पर जड़ी-बूटियों को पेटेंट कराएंगे।

प्रथम चरण की शुरुआत 3 फरवरी से दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी से हो गयी है। चिकित्सकीय अभ्यास में भारतीय पारंपरिक हर्बल दवाओं के पुनर्जीवन, आधुनिकीकरण और एकीकरण व नीतियां, कार्यक्रम और संभावनाएं विषय पर साइंस कॉलेज मैदान स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागृह रायपुर में यह संगोष्ठी होगी। इसमें प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर के हर्बल वैज्ञानिक छत्तीसगढ़ की वनौषधियों पर मंथन करेंगे। देशी-विदेशी कंपनियों के प्रतिनिधि छत्तीसगढ़ की ऐसी वनौषधियों पर रिसर्च करने का अनुबंध पादप बोर्ड से करेंगे जिन पर अभी तक शोध नहीं हुआ है।

आपको बता दें की 200 साल पूर्व छत्तीसगढ़ के 90 प्रतिशत हिस्से में जंगल थे। उस समय आदिवासियों का जीवन पूरी तरह जंगलों-वनौषधियों पर निर्भर था। इसलिए यहां की वनषौधियां सैकड़ों वर्षों से व्यवहारिक उपयोग में हैं। इन जिलों में भरपूर भंडार देखने को मिल रहे है। इसमें बस्तर संभाग, सरगुजा संभाग, बिलासपुर संभाग के लगभग सभी जिलों में वनौषधियां पाईं जाती हैं। यहां स्व सहायता समूहों के जरिए वनौषधीय प्रसंस्करण केन्द्र संचालित हो रहे हैं। यह हमारे लिए बड़े गर्व की बात है।




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