चामुंडा देवी जी का मंदिर भारत का प्राचीन मंदिरों में से एक

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चामुंडा देवी जी का मंदिर भारत का प्राचीन मंदिरों में से एक है, जो कि हिमाचल प्रदेश में स्थित है। यह मंदिर माँ चामुंडा देवी का समर्पित है जोकि भगवती काली का ही एक रूप है। चामुंडा देवी मंदिर को चामुंडा नन्दिकेश्वर धाम के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि चामुंडा देवी मंदिर में ‘शिव और शक्ति’ का वास है। चामुंडा देवी के मंदिर के पास भगवान शिव विराजमान है जो कि नन्दिकेश्वर के नाम से जाने जाते है। चामुंडा देवी जी का मंदिर बाणगंगा (बानेर) नदी के किनारे पर स्थित है। चामंुडा देवी का मंदिर बहुत ही अपनी एक धार्मिक महत्वता है तथा यह मंदिर लगभग 16वीं सदी का है। नव राात्रि के त्यौहार के दौरान बड़ी संख्या में लोग दर्शनों के लिए मंदिर में आते है।

ऐसा माना जाता है कि लगभग 400 सालों पहले राजा और ब्राह्मण पुजारी ने मंदिर को एक उचति स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए देवी माँ से अनुमति मांगी। देवी माँ ने इसकी सहमति देने के लिए पुजारी को सपनें में दर्शन दिऐ औरएक निश्चित स्थान पर खुदाई करने निर्देश दिया था। खुदाई के स्थान पर एक प्राचीन चामुंडा देवी मूर्ति पाई गई थी, चामुंडा देवी मूर्ति को उसी स्थान पर स्थापित किया गया और उसकी रूप में उसकी पूजा की जाने लगी।
राजा ने मूर्ति को बाहर लाने के लिए पुरुषों को कहा, परन्तु सभी पुरुष उसी मूर्ति हिलाने व बाहर लाने सक्षम नहीं थे। फिर देवी माँ ने पुजारी को सपनें में दर्शन दिये और देवी माँ ने कहाँ कि सभी पुरुष मूर्ति का साधारण पत्थर समझ कर उठाने की कोशिश कर रहे है। देवी माँ ने पुजारी से कहां कि वह सबुह जल्दी उठें व स्नान करें तथा पवित्र कपडे पहनें और एक सम्मानजनक तरीके से बाहर लाने के निर्देश दिए, और कहाँ कि वह सभी पुरुष मिल कर जो नहीं कर सकें वह अकेला आसानी से तभी कर पायेगा। पुजारी ने सभी लोगों का बताया कि यह सब देवी माँ की शक्ति थी। मंदिर में अब महात्म्य, रामायण और महाभारत के दृश्य को दर्शाया गया है। माँ चामुंडा देवी में मूर्ति में भगवान हनुमान और भैरों दोनों की छवि नजर आती है यह मंदिर बहुत साल पुराना और    इस  में देवी माँ के दर्शन के लिए श्रद्धालु दूर दूर वसे आते है




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