कैसे मिला एक स्थानीय मेले को विश्वस्तरीय कुम्भ का आकार |

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महानदी-पैरी-सोंढूर की त्रिवेणी राजिम पर होता है तर्पण और पवित्रता का विहंगम संगम जहां हजारों साधु संत करते हैं सनातन धर्म, संस्कृति और संस्कारों का मंथन। एक पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने भगवान विश्वकर्मा से इच्छा व्यक्त की कि वे भूलोक पर जाकर ऐसी जगह पर उनके लिए एक सांसारिक निवास का निर्माण करें जहां दस कोस दूर तक कभी किसी मृतक का दाह-संस्कार न हुआ हो। पूरी पृथ्वी का भ्रमण करने के बाद भी ऐसी कोई जगह न मिलने पर भगवान विश्वकर्मा खाली हाथ स्वर्गलोक वापिस लौट गए। तब भगवन विष्णु ने एक कमल का फूल भूलोक की ओर उछाल कर उनसे कहा कि जहां यह फूल गिरेगा आप उसी स्थल पर मेरे आवास का निर्माण करें। उस जगह पर राजिम नगरी के राजिम लोचन मंदिर का निर्माण हुआ और कमल की पांच पंखुड़ियां बनीं पंचकोशी धाम जिन्हें आज कुलेश्वर नाथ, चम्पेश्वर नाथ, ब्रह्म्केश्वर नाथ, पांडेश्वरनाथ और कोपेश्वरनाथ के नामों से जाना जाता है।




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