सिरपुर (समृध्दि की नगरी)

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सिरपुर महासमुंद जिले में स्थित है, जो कि महानदी के पूर्वी तट पर स्थित है। यह राष्‍ट्रीय राजमार्ग क्र. 06 पर आरंग के बाद आगे की ओर 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सिरपुर प्राचीन समय में दक्षिण कौशल की राजधानी रही है।  सिरपुर पाण्‍डुवंशी, सोमवंशी एवं शरभपुरीय सम्राटों की राजधानी भी रही है। सन 639 ई. में चीनी यात्री ने सिरपुर की यात्रा की थी। सिरपुर में महाशिवरात्रि पर मेला लगता है। छत्‍तीसगढ़ शासन द्वारा बुध्दि पूर्णिमा के दिन सिरपुर महोत्‍सव का आयोजन किया जाता है। सिरपुर के दर्शनीय स्‍थलों में लाल ईंटो से निर्मित लक्ष्‍मण मंदिर सर्वाधिक प्रसिध्‍द है। इस मंदिर का निर्माण महारानी वासटा ने अपने पति हर्ष गुप्‍त की याद में कराया था। यह मूल रूप से विष्‍णु मंदिर है। अभिलेख के अनुसार इस मंदिर का निर्माण 650 ई. के आसपास है। मंदिर के गर्भ गृह में लक्ष्‍मण एवं शेष नाग सांप की पत्‍थर की प्रतिमा है। इसी कारण इस मंदिर को लक्षमण मंदिर कहा जाता होगा। इस मंदिर की दीवारों में जमीन से लगभग 50 फीट की उंचाई पर विभिन्‍न हिन्‍दू देवी देवताओं, किन्‍नरों, यक्ष, पशुओं  एवं पुष्‍पों की सुंदर कलाकृतियां बनी हुई है। ईंटों पर किसी भी प्रकार का प्‍लास्‍टर नहीं के बावजूद भी इसका सौंदर्य पर्यटकों का मन मोह लेती है।  लक्षमण मंदिर के अतिरिक्‍त यहां राम मंदिर, गंधेश्‍वर महादेव मंदिर, एवं संग्राहलय आदि दर्शनीय है। गंधेश्‍वर महादेव मंदिर का जीर्णोध्‍दार चिमन जी भोसला ने कराया था। इस मंदिर के प्रांगन में विभिन्‍न धर्म भगवान बुध्‍द, जैन मूर्ति, नटराज, विष्‍णु मंदिर, महिसासुर मदिर्नी की मूर्तियां है। सिरपुर महायान, जैन एवं बौध्‍द धर्म का बहुत बड़ा केन्‍द्र रहा है। यहां विभिन्‍न बौध्‍द स्‍मारक है, जिनमें से स्‍वातिक विहार, प्रभुकुटी विहार, तीवरदेव आदि उल्‍लेखनीय है।




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