सिरपुर

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सिरपुर या श्रीपुर या सीरपुर छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी रायपुर से लगभग 78 किमी दूर  महानदी के तट पर स्थित है। सिरपुर में लक्ष्मण मंदिर भारत में पहली ईंट से निर्मित मंदिर है। सिरपुर को श्रीपुर के नाम से भी जाना जाता है इसका अर्थ है “शुभता का शहर”, “बहुतायत”, “लक्ष्मी”। यह छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एक गांव है और यह महानदी नदी के तट पर राजधानी रायपुर से 78 किमी दूर और महासमुंद शहर से 35 किमी दूर है | सिरपुर का प्राचीन नाम श्रीपुर है, इतिहासकारों के अनुसार सिरपुर पांचवीं शताब्दी के मध्य दक्षिण कौसल की राजधानी रह चुका है। छठी शताब्दी में चीनी यात्री व्हेनसांग भी यहां आया था। छठी शताब्दी में निर्मित भारत का सबसे पहले ईंटों से बना मंदिर है।यह मंदिर सोमवंशी राजा हर्षगुप्त की विधवा रानी बासटा देवी द्वारा बनवाया गया था। अलंकरण, सौंदर्य, मौलिक अभिप्राय तथा निर्माण कौशल की दृष्टि से यह अपूर्व है। लगभग 07 फुट ऊंची पाषाण निर्मित जगती पर स्थित यह मंदिर रानी बासटा, महाशिव गुप्त बालार्जुन की माता एवं मगध के राजा सूर्यबर्मन की पुत्री थी, यह अत्यंत भव्य है।पंचस्थ प्रकार का यह मंदिर गर्भगृह, अंतराल तथा मंडप से संयुक्त है। मंदिर के बाह्य भित्तियों पर कूट-द्वार बातायन आकृति चैत्य गवाक्ष, भारवाहकगर्ण, गज, कीर्तिमान आदि अभिप्राय दर्शनीय है। मंदिर का प्रवेश द्वार अत्यंत सुंदर है। सिरदल पर शेषदायी विष्णु प्रदर्शित है। उभय द्वार शाखाओं पर विष्णु के प्रमुख अवतार  विष्णु लीला के दृश्य अलंकारात्मक प्रतीक, मिथुन दृश्य तथा वैष्णव द्वारपालों का अंकन है। गर्भगृह में रागराज अनंत शेष की बैठी हुई सौम्य प्रतिमा स्थापित है। इसमें बारीक नक्‍काशी और कला का चित्रण है जो इस मंदिर को और आकर्षित बनाती है  स्थानीय लोगों की मांग पर वर्ष 2006 से सिरपुर महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव से सिरपुर को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।इस भूमि पर विभिन्न संप्रदायों के मंदिर, मठ, देवालय हैं जो इसकी विशिष्ट संस्कृति और परंपराओं को और भी सुदृढ़ बनाते हैं.



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