सुरंग टीला सिरपुर

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सिरपुर छत्तीसगढ़ में महानदी के तट स्थित एक पुरातात्विक स्थल है। इस स्थान का प्राचीन नाम श्रीपुर है यह एक विशाल नगर हुआ करता था तथा यह दक्षिण कोशल की राजधानी थी।ईंटों से बना हुआ प्राचीन लक्ष्मण मंदिर आज भी यहाँ का दर्शनीय स्थान है। उत्खनन में यहाँ पर प्राचीन बौद्ध मठ भी पाये गये हैं।कहा जाता है कि पुराने समय में यहाँ के स्थानीय लोग मानते थे कि इस टीले के नीचे बेशुमार दौलत और खजाना गढ़ा हुआ है। लुटेरों ने यहाँ से पैसा लूटने की बहुत कोशिश की पर उनकी सभी कोशिशें नाकाम रहीं। मिस्टर चिशाम नाम के एक अंग्रेज़ जो उस समय रायपुर में थे, जब उन्हें इस टीले में गढ़े हुए अपार धन के बारे में ज्ञात हुआ तो उन्होंने जल्दी ही मज़दूरों की एक टुकड़ी को काम पर रखा और टीले की खुदाई का काम शुरू करवा दिया। मज़दूरों को टीले के बीच में गहरा गढ्ढा खोदने का आदेश दिया गया। ज़्यादा गहराई में खुदाई करते समय एक मजदूर की जान चली गई तो चिशाम ने घबराकर खुदाई का काम बंद करवा दिया। समय बीता और वही गढ्ढा धीरे-धीरे एक सुरंग में तब्दील हो गया। और तब, हिंदी भाषा के दो शब्दों ‘सुरंग’ और ‘टीला’ के मेल से इस मंदिर के वर्तमान नाम की उत्पत्ति हुई और यह प्राचीन मंदिर ‘सुरंग टीला’ के नाम से प्रसिद्ध हो गया।




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